मंगलवार, 21 मई 2013

ग़ज़ल

तू मुझे कभी ना समझा था .....

तू मुझे कभी ना समझा था,
मै बगैर तेरे अधूरा था।।

मैंने तेरी आँखों में जो पढ़ा था,
वो प्यार नहीं और क्या था।।

तूने तो साथ निभाया हरदम,
एक मै ही ना कुछ दे सका था।।

अजीब गुदगुदी सी हुई थी,
जब किसी ने तेरा नाम लिया था।।

तुझे पाने की ख्वाहिश जैसे,
एक नामुमकिन सा सपना था।।

आज फरामोश कर दिया उसने,
बरसों तक दिल में जो रहा था।।

देखा तो दोनों हाथ खाली थे,
जब इस दुनिया से मैं चला था।।

खुशियों ने किया गुरेज़ मुझसे,
पर दुःख तो मेरा 'अपना' था।।

कॉपीराइट @दुर्गेश कुमार ''शाद''