जीवन की बस इतनी व्यथा है,
जो ना मिला वो एक कथा है।।
साथ रहे मगर रहे अनभिज्ञ,
क्यों ना हमने रिश्तों को मथा है।।
रावण भी, राम भी मिल जायेंगे,
यहाँ हरेक मन में एक कथा है।।
देखो शबरी भी मिल जाएगी,
जिन खोजों में प्रेम व्यथा है ।।
वह शहर भी हमने रौशन देखा,
जहाँ अंधकार भी एक प्रथा है ।।
कॉपीराईट @दुर्गेश कुमार ''शाद''
जो ना मिला वो एक कथा है।।
साथ रहे मगर रहे अनभिज्ञ,
क्यों ना हमने रिश्तों को मथा है।।
रावण भी, राम भी मिल जायेंगे,
यहाँ हरेक मन में एक कथा है।।
देखो शबरी भी मिल जाएगी,
जिन खोजों में प्रेम व्यथा है ।।
वह शहर भी हमने रौशन देखा,
जहाँ अंधकार भी एक प्रथा है ।।
कॉपीराईट @दुर्गेश कुमार ''शाद''