गुरुवार, 15 जनवरी 2015

ग़ज़ल - "नातवां अहसास"


फिर मिलन की आस है, तेरे जाने के बाद,
मुझे ए-ज़िन्दगी तलाश है तेरे जाने के बाद।।


मुझे लगा वो ना समझे, उन्हें लगा के मैं,
कुछ नातवां अहसास है तेरे जाने के बाद।।


मिले कभी गर पूछना सबब इसका,
क्यों ज़िन्दगी उदास है तेरे जाने के बाद।।


ज़रख़ाक़ अल्फाज़ हैं, जिन्हें चॉंद पे था टॉंकना,
नज़रबंद अहसास है तेरे जाने के बाद।।


लिबास-से ढोते रहे लाशे-बदन ता-ज़िन्दगी,
''शाद'' भी बस कयास है तेरे जाने के बाद।।


कॉपीराइट दुर्गेश कुमार "शाद"

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